
तस्वीर: फ्री प्रेस जर्नल (स्रोत फोटो)
इंदौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक बैठकों में से एक, अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक, 2 नवंबर से मध्य प्रदेश के इंदौर में शुरू हो रही है। यह बैठक 2, 3 और 4 नवंबर 2026 तक चलेगी। इसमें संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित देशभर से लगभग 408 प्रमुख कार्यकर्ता शामिल होंगे। बैठक का आयोजन इंदौर के ऐतिहासिक डेली कॉलेज परिसर में किया जा रहा है।
संघ की ओर से 31 अक्टूबर को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी, संघ के काम के विस्तार का आकलन होगा और भविष्य की योजनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। संघ की स्थापना 1925 में हुई थी और विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक उसका शताब्दी वर्ष मनाया गया। इस अवधि में देशभर में विविध कार्यक्रम और उपक्रम आयोजित हुए, जिनके अनुभवों को अब भविष्य की कार्ययोजना में ढालने की तैयारी है।
408 कार्यकर्ता, 11 क्षेत्र और 46 प्रांत
बैठक में भाग लेने वाले 408 कार्यकर्ताओं में सरसंघचालक और सरकार्यवाह के साथ सभी सह-सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्य विभागों के प्रमुख, कार्यकारी मंडल के सदस्य तथा 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के संघचालक, सह-संघचालक, कार्यवाह, सह-कार्यवाह, प्रचारक और सह-प्रचारक शामिल होंगे। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने 31 अक्टूबर को पत्रकार वार्ता में बैठक की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि सरसंघचालक डॉ. भागवत बैठक के तीनों दिन उपस्थित रहेंगे।
बैठक का विधिवत शुभारंभ 2 नवंबर को सुबह 9 बजे होगा। अंतिम दिन, 4 नवंबर को सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे और बैठक के विचार-विमर्श तथा भविष्य की योजनाओं की पूरी जानकारी देंगे। इंदौर में कार्यकारी मंडल की बैठक 26 वर्ष बाद हो रही है। इससे पहले वर्ष 2000 में केशव विद्यापीठ में इस बैठक का आयोजन हुआ था। यह लगातार दूसरा वर्ष है, जब संघ की यह महत्वपूर्ण वार्षिक बैठक मध्य प्रदेश में हो रही है — इससे पहले वर्ष 2025 की बैठक जबलपुर में हुई थी।
शाखाओं का विस्तार: एक लाख से अधिक दैनिक शाखाएं
बैठक में संघ के काम के विस्तार की समीक्षा एक प्रमुख विषय होगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्तमान में देशभर में 1,01,151 दैनिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। साप्ताहिक मिलन और अन्य गतिविधियों को मिलाकर संघ का काम लगभग 1,10,849 स्थानों तक पहुंच गया है। पिछले वर्ष अक्टूबर की तुलना में 13,000 से अधिक नई दैनिक शाखाएं जुड़ी हैं।
शताब्दी वर्ष से पहले संघ ने तीन वर्षीय विशेष विस्तार योजना बनाई थी। इस बैठक में उस योजना के परिणामों और अनुभवों की समीक्षा होगी तथा संगठन के विस्तार की आगे की दिशा पर चर्चा होगी। शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में कुल 65,660 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। ये सम्मेलन शहरी क्षेत्रों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में मंडल स्तर पर हुए, जिन्हें समाज का व्यापक समर्थन मिला। गृह संपर्क अभियान, यानी घर-घर संपर्क कार्यक्रम में भी लोगों ने उत्साह से भाग लिया।
महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को बैठक में विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा। गृह संपर्क अभियान, प्रमुख जन गोष्ठियों और हिंदू सम्मेलनों में महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी की। ग्रामीण क्षेत्रों, विश्वविद्यालय परिसरों और अन्य स्थानों पर युवा महिलाओं और पुरुषों के लिए आयोजित कार्यक्रमों में भी उत्साहजनक भागीदारी देखी गई।
बैठक में युवाओं की आकांक्षाओं, समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दृष्टिकोण तथा बातचीत के दौरान मिले सुझावों पर विचार किया जाएगा, ताकि भविष्य के कार्यक्रम बनाते समय उन्हें ध्यान में रखा जा सके। महिलाओं और युवाओं के बीच बढ़े संपर्क का आकलन भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। संघ का मानना है कि समाज की भागीदारी से ही उसके सेवा और संगठन कार्य आगे बढ़ते हैं, इसलिए भविष्य की योजनाओं में समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने पर जोर रहेगा।
संगठनात्मक ढांचे में बदलाव पर मंथन
बैठक में संघ के संगठनात्मक ढांचे में प्रस्तावित बदलावों पर भी विचार-विमर्श होगा। इसके बाद मार्च में नागपुर में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से पहले जिला, विभाग, प्रांत और क्षेत्र स्तर से होते हुए संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और नागपुर की बैठक में सरकार्यवाह का चुनाव पूरा होगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण विषय नशीले पदार्थों का बढ़ता प्रचलन होगा। बैठक में इस पर चर्चा होगी कि सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से युवाओं को नशे से बचाने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान कैसे चलाए जाएं। इसके साथ ही नए मीडिया मंचों पर सामग्री, भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप और वैश्विक परिदृश्य जैसे समसामयिक विषयों पर भी चर्चा होने की जानकारी दी गई है।
वैश्विक संवाद और पंच परिवर्तन
बैठक में सरसंघचालक डॉ. भागवत की अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड यात्राओं के दौरान हुए वैश्विक संवाद की समीक्षा भी होगी। चर्चा का केंद्र भारत के सभ्यतागत विचार, हिंदुत्व की सही समझ और विश्व के कल्याण में भारत की भूमिका को आगे बढ़ाने का संवाद होगा। संत रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा भी की जाएगी।
शताब्दी वर्ष में संघ ने पंच परिवर्तन के पांच विषयों — सामाजिक समरसता, पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी और राष्ट्रीय स्वबोध तथा नागरिक कर्तव्य — को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने का प्रयास किया। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों और संस्थाओं के सहयोग से इन विषयों पर नए कार्यक्रमों और पहलों की योजना बनाई जाएगी।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में सुनील आंबेकर ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ के पंजीकरण जैसा कोई विचार नहीं है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष में संघ के विचार-विमर्श के केंद्र में यह प्रश्न रहे कि हिंदुत्व क्या है, भारत क्या है और भारत को कैसे आगे बढ़ना चाहिए। संघ नई तकनीक का विरोध नहीं करता, लेकिन मनुष्य के रूप में यह विचार करना जरूरी है कि तकनीक का उपयोग किस तरह किया जाए।
आगे की राह
इंदौर की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह शताब्दी वर्ष के समापन के तुरंत बाद हो रही है। इसमें पिछले एक वर्ष के कार्यक्रमों का लेखा-जोखा होगा और अगले वर्षों की दिशा तय होगी। संगठन के विस्तार, समाज की भागीदारी, युवाओं और महिलाओं को जोड़ने तथा वैश्विक संवाद को आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर लिए गए निर्णय आने वाले समय में संघ की कार्यशैली की रूपरेखा तय करेंगे। 4 नवंबर को सरकार्यवाह की पत्रकार वार्ता से इन निर्णयों की आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।
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स्रोत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आधिकारिक विज्ञप्ति (31 अक्टूबर 2026), फ्री प्रेस जर्नल (1 नवंबर 2026), न्यू इंडियन एक्सप्रेस (1 नवंबर 2026), ईटीवी भारत (31 अक्टूबर 2026)।
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