
तस्वीर: द वीक (स्रोत फोटो)
नई दिल्ली। विपक्षी INDIA गठबंधन ने रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'चलो दिल्ली' रैली का आयोजन किया। इस रैली में गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और उन पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस रैली को लेकर तीखा पलटवार किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रैली की तारीख को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा, जबकि भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने रैली में भीड़ के दावे को खारिज किया।
रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, भाकपा महासचिव डी. राजा और माकपा महासचिव एम. ए. बेबी सहित कई विपक्षी नेता मौजूद थे। इससे पहले INDIA गठबंधन के नेता मिंटो रोड-कनॉट प्लेस चौराहे से खुले वाहन में रामलीला मैदान की ओर बढ़े, जिनके साथ सैकड़ों समर्थक भी चले।
राहुल गांधी ने क्या कहा: 'ज्ञानेश कुमार को हटाया जाएगा, जेल भी होगी'
रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाया जाएगा और 'देशद्रोह' के लिए उन्हें जेल भी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी 'कानूनी कार्रवाई' होगी। राहुल गांधी ने कहा, "अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा रहे हैं। मैं आपको इसके उलट बता रहा हूं: नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा सकते। अगर वह जाना भी चाहें, तो हम उन्हें जाने नहीं देंगे।"
राहुल गांधी ने रैली में जुटी भीड़ को युवाओं, किसानों और मजदूरों की आवाज बताया और आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में कथित वोट चोरी हुई है। उन्होंने यह आरोप भी दोहराया कि भाजपा ने मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विधानसभा चुनावों तथा 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान में हेरफेर किया। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं; भाजपा ने इन्हें खारिज किया है।
खरगे का आरोप: 'मोदी हटेंगे तभी लोकतंत्र बचेगा'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रैली में कहा कि केंद्र सहित कई भाजपा सरकारें 'चोरी के जनादेश' से बनी हैं और लोकतंत्र बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाना जरूरी है। उन्होंने कहा, "मोदी जाएगा तभी लोकतंत्र बचेगा, मोदी को हटाएंगे तभी लोकतंत्र को बचाएंगे, मोदी को हटाओ, लोकतंत्र को बचाओ।"
खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मोदी और शाह ने दलितों, युवाओं और महिलाओं का वोट छीनने का प्रयास किया है। मोदी जी अपने आदमी गणेश कुमार के जरिए उनका वोट लेना चाहते हैं। हम तब तक लड़ते रहेंगे जब तक वह नहीं जाते और उनकी विदाई सुनिश्चित करेंगे।" खरगे ने यह भी कहा कि अगर मुख्य निर्वाचन आयुक्त भूमिगत भी छिप जाएं, तो भी विपक्ष उन्हें ढूंढ लेगा। उन्होंने महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों को भी 'चोरी की सरकार' बताया।
अमित शाह का पलटवार: 1984 की बरसी पर रैली 'पीड़ितों के घावों पर नमक'
रैली के दिन ही चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। शाह ने कहा कि 1 नवंबर को दिल्ली में रैली करना 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने याद दिलाया कि 1 नवंबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में हिंसा भड़की थी, जिसमें हजारों सिख मारे गए थे।
शाह ने कहा कि भाजपा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए विपक्ष से अपील की थी कि वह 1, 2 और 3 नवंबर को रैली न करे, क्योंकि ये तारीखें सिख समुदाय के लिए संवेदनशील हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद विपक्ष ने अपना कार्यक्रम नहीं बदला। शाह ने यह आरोप भी लगाया कि रैली की तारीख तय करने के पीछे 'विदेश से आए निर्देश' थे। इस आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। शाह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने दंगा मामलों को दोबारा खोला है, पीड़ितों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है और प्रमुख कांग्रेस नेताओं को जेल भेजा है। ये दावे शाह की ओर से किए गए हैं।
चंडीगढ़ कार्यक्रम में शाह ने विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया, जिनकी कुल लागत 258 करोड़ रुपये बताई गई है। इसी मंच से उन्होंने विपक्ष की रैली को 'जलसा' बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने भाजपा की अपील को नजरअंदाज किया।
संबित पात्रा का दावा: '28,000 कुर्सियों में 5,000-7,000 खाली थीं'
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पुरी से सांसद संबित पात्रा ने भी रैली को लेकर पलटवार किया। पात्रा ने कहा कि रामलीला मैदान में 28,000 कुर्सियां लगाई गई थीं, जिनमें से दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच लगभग 5,000 से 7,000 कुर्सियां खाली थीं। उन्होंने कहा कि रैली में 10 लाख लोगों के आने का दावा किया गया था, लेकिन मैदान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खाली था। पात्रा ने रैली को 'अराजकता का तमाशा' बताया।
पात्रा ने 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्ष के आरोप पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार 2024 के चुनाव के समय मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं थे, बल्कि वह 2025 में इस पद पर आए। पात्रा ने पूछा कि अगर 2024 का चुनाव अवैध था, तो विपक्ष ने पिछले दो वर्षों में अदालत में इसे चुनौती क्यों नहीं दी। उन्होंने कहा, "अगर चुनाव अवैध है, तो अदालत में चुनौती दीजिए। आप ढाई साल बाद रामलीला मैदान में चुनाव को अवैध घोषित नहीं कर सकते।"
विवाद की जड़: एसआईआर और मतदाता सूची से नाम हटने का आरोप
इस पूरे विवाद की जड़ मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिससे योग्य मतदाता मतदान से वंचित हो सकते हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को घेरा है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।
भाजपा और चुनाव आयोग के समर्थकों का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता के लिए पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है और विपक्ष के आरोप निराधार हैं। रैली के बाद भी दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम नजर आए। विपक्ष ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है, जबकि भाजपा ने इसे राजनीतिक विफलता बताया है।
आगे क्या: राष्ट्रपति से फिर मिलने की तैयारी?
रैली के बाद विपक्ष की अगली रणनीति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, INDIA गठबंधन एक बार फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांग सकता है और उन्हें 'वोट चोरी' के कथित प्रमाण सौंप सकता है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह सुझाव 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति से हुई मुलाकात के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रपति ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से प्रमाण देने को कहा था।
उसी रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष दिल्ली से आगे बढ़कर उन राज्यों में भी प्रदर्शन ले जाने की योजना बना रहा है, जहां उसके प्रमुख सहयोगी दल संगठन की अगुवाई करेंगे। हालांकि, अभी इस बारे में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 9 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया था और एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर पिछले दो वर्षों के विधानसभा चुनावों को रद्द करने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने, एसआईआर को निलंबित करने और मतदान के लिए मतपत्रों पर लौटने की मांग वाला ज्ञापन सौंपा था।
1 नवंबर की रैली ने यह साफ कर दिया है कि मतदाता सूची और चुनाव आयोग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विपक्ष अपना आंदोलन राज्यों तक कैसे ले जाता है और चुनाव आयोग इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है।
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स्रोत: द हिंदू (1 नवंबर 2026), द वीक (1 नवंबर 2026), डेक्कन हेराल्ड (1 नवंबर 2026), इंडिया टीवी (1 नवंबर 2026), इकोनॉमिक टाइम्स लाइव ब्लॉग (1 नवंबर 2026)।
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